टुडे न्यूज़ इन हंद अमर उजल

बलवंत पटियाल के दोनों बच्चे शशांक पटियाल व कनिका घुमारवीं में पढ़ते हैं। बलवंत की जिंदगी में भी भूस्खलन ने तबाही मचाई है। इनके पास भी यादें ही बची हैं। उन्होंने हौसला तो नहीं छोड़ा है लेकिन यही चिंता सता रही है कि खाली हाथ परिवार का पालन पोषण कैसे करेंगे। बलवंत ने कहा मकान बनाने के लिए उसके पास जमीन नहीं बची है। रंजीत सिंह की चार बेटियां अंजलि, मधु बाला, सुमन व शालिनी हैं। इनमें से कुछ कॉलेज में पढ़ती हैं। रंजीत चारों बेटियों को अफसर बनाना चाहता था लेकिन भूस्खलन ने उनके सपने को चकनाचूर कर दिया। राहत शिविर में मौजूद नंद लाल, सुखदेई, जैदेई सहित सभी परिवारों का कहना है कि कुछ दिन तो मदद से निकल जाएंगे लेकिन बाकी जिंदगी कैसे कटेगी। कैसे वे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करेंगे? बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे और मकान कैसे बनाएंगे।
नईदिल्ली:हाथरसमेंगैंगरेपपीड़िताकोइंसाफदिलानेकेलिएएबीपीन्यूज़कीमुहीमजारीहै.एबीपीन्यूज़कीप्रशासनसेसिर्फअनुरोधहैकिपीड़ितपरि
हाथरस:हाथरसगैंगरेपमामलेमेंएबीपीन्यूज़कीमुहिमकाबड़ाअसरहुआहै.हाथरसकेएसपीविक्रांतवीरसिंह,क्षेत्राधिकारी(CO)रामशब्द,इंस्पेक्